इतिहास की धरोहरों में विज्ञान और तकनीक का अद्भुत समन्वय
इतिहास की धरोहरों में विज्ञान और तकनीक का अद्भुत समन्वय आज हम “हार्डवेयर” और “सॉफ्टवेयर” जैसे शब्दों को आधुनिक कंप्यूटर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स से जोड़ते हैं, लेकिन इनकी मूल अवधारणा प्राचीन काल में भी अलग-अलग रूपों में उपस्थित थी। उस समय मशीनों और कंप्यूटरों का वर्तमान स्वरूप नहीं था, फिर भी उपकरण बनाने, उनका संचालन करने, रणनीति तैयार करने और प्राकृतिक शक्तियों का उपयोग करने का व्यवस्थित ज्ञान मौजूद था। धनुष-बाण, किले, राजमहल, मंदिर और चर्च केवल ऐतिहासिक या धार्मिक रचनाएँ नहीं हैं। इनमें गणित, भौतिक विज्ञान, वास्तुकला, ध्वनि विज्ञान, पदार्थ विज्ञान, जल प्रबंधन और पर्यावरणीय अभियांत्रिकी का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। धनुष था हार्डवेयर, कौशल था सॉफ्टवेयर प्राचीन युद्धकला में धनुष को आधुनिक भाषा में “हार्डवेयर” कहा जा सकता है। धनुष की लकड़ी, उसकी प्रत्यंचा, बाण की लंबाई, नोक का आकार और उसका संतुलन—ये सभी उसके भौतिक घटक थे। लेकिन केवल अच्छा धनुष होने से विजय निश्चित नहीं होती थी। उसे चलाने वाले योद्धा का प्रशिक्षण, लक्ष्य पर ध्यान, दूरी का अनुमान, हवा की दिशा की समझ, सही कोण का चयन और प्...