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समय: सबके पास समान, उपयोग सबका अलग

समय: सबके पास समान, उपयोग सबका अलग दुनिया में किसी के पास अधिक धन है, किसी के पास बेहतर अवसर हैं और किसी को परिवार या परिस्थितियों का अधिक सहयोग मिलता है। इसलिए कभी-कभी ऐसा लगता है कि सफलता केवल भाग्यशाली लोगों को ही मिलती है। यह बात कुछ सीमा तक सही हो सकती है, लेकिन एक सत्य ऐसा है जो कभी नहीं बदलता— हर व्यक्ति को प्रतिदिन केवल 24 घंटे ही मिलते हैं। चाहे वह विद्यार्थी हो, शिक्षक हो, कर्मचारी हो, व्यापारी हो या दुनिया का सबसे सफल व्यक्ति—समय किसी के साथ भेदभाव नहीं करता। कोई भी व्यक्ति पैसे देकर दिन में एक अतिरिक्त घंटा नहीं खरीद सकता। बीता हुआ समय वापस नहीं लाया जा सकता और न ही आज के समय को बचाकर भविष्य में उपयोग किया जा सकता है। इसलिए प्रश्न यह नहीं है कि हमारे पास कितना समय है। असली प्रश्न यह है कि— हम अपने 24 घंटों का उपयोग कैसे करते हैं? व्यस्त रहना और सही काम करना अलग-अलग हैं कई लोग पूरा दिन व्यस्त रहते हैं, लेकिन दिन के अंत में उनके पास दिखाने के लिए कोई सार्थक परिणाम नहीं होता। वहीं कुछ लोग सीमित समय में अपनी प्राथमिकताएँ तय करके महत्त्वपूर्ण कार्य पूरे कर लेते हैं। समय का सही उ...

जिम्मेदारी किसकी?—पहल, सहभागिता और सामाजिक परिवर्तन की कहानी

  जिम्मेदारी किसकी?—पहल, सहभागिता और सामाजिक परिवर्तन की कहानी हमारे जीवन में अनेक ऐसे कार्य होते हैं जिन्हें पूरा करना अत्यंत आवश्यक होता है। वे कार्य किसी एक व्यक्ति के नहीं, बल्कि पूरे परिवार, संस्था, समुदाय या समाज के हित से जुड़े होते हैं। समस्या तब उत्पन्न होती है, जब प्रत्येक व्यक्ति यह सोचकर बैठ जाता है कि कोई दूसरा व्यक्ति उस काम को अवश्य कर देगा। एक प्रसिद्ध कहानी में चार पात्र हैं— Everybody, Somebody, Anybody और Nobody , अर्थात् हर कोई, कोई व्यक्ति, कोई भी और कोई नहीं। एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण काम पूरा किया जाना था। वह काम सभी की जिम्मेदारी था। हर किसी को विश्वास था कि कोई न कोई व्यक्ति उसे अवश्य पूरा कर देगा। वास्तव में, कोई भी उस काम को कर सकता था, लेकिन अंततः किसी ने भी उसे नहीं किया। जब काम अधूरा रह गया तो किसी व्यक्ति को गुस्सा आया, क्योंकि वह सभी की जिम्मेदारी थी। हर किसी ने सोचा था कि कोई भी इसे कर सकता है, लेकिन किसी ने यह नहीं समझा कि सभी लोग स्वयं काम करने के बजाय दूसरों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अंत में, हर किसी ने किसी न किसी को दोषी ठहराया, जबकि वास्तविकता यह ...

इतिहास की धरोहरों में विज्ञान और तकनीक का अद्भुत समन्वय

  इतिहास की धरोहरों में विज्ञान और तकनीक का अद्भुत समन्वय आज हम “हार्डवेयर” और “सॉफ्टवेयर” जैसे शब्दों को आधुनिक कंप्यूटर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स से जोड़ते हैं, लेकिन इनकी मूल अवधारणा प्राचीन काल में भी अलग-अलग रूपों में उपस्थित थी। उस समय मशीनों और कंप्यूटरों का वर्तमान स्वरूप नहीं था, फिर भी उपकरण बनाने, उनका संचालन करने, रणनीति तैयार करने और प्राकृतिक शक्तियों का उपयोग करने का व्यवस्थित ज्ञान मौजूद था। धनुष-बाण, किले, राजमहल, मंदिर और चर्च केवल ऐतिहासिक या धार्मिक रचनाएँ नहीं हैं। इनमें गणित, भौतिक विज्ञान, वास्तुकला, ध्वनि विज्ञान, पदार्थ विज्ञान, जल प्रबंधन और पर्यावरणीय अभियांत्रिकी का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। धनुष था हार्डवेयर, कौशल था सॉफ्टवेयर प्राचीन युद्धकला में धनुष को आधुनिक भाषा में “हार्डवेयर” कहा जा सकता है। धनुष की लकड़ी, उसकी प्रत्यंचा, बाण की लंबाई, नोक का आकार और उसका संतुलन—ये सभी उसके भौतिक घटक थे। लेकिन केवल अच्छा धनुष होने से विजय निश्चित नहीं होती थी। उसे चलाने वाले योद्धा का प्रशिक्षण, लक्ष्य पर ध्यान, दूरी का अनुमान, हवा की दिशा की समझ, सही कोण का चयन और प्...

अपनी शक्ति को पहचानिए — हनुमान जी की सरलता और जामवंत जी का मार्गदर्शन

  अपनी शक्ति को पहचानिए — हनुमान जी की सरलता और जामवंत जी का मार्गदर्शन हनुमान जी शक्ति, बुद्धि, साहस और भक्ति के अद्भुत प्रतीक हैं। उनके जीवन का एक प्रसंग हमें सिखाता है कि मनुष्य के भीतर अपार क्षमताएँ होने के बाद भी कभी-कभी उसे अपनी शक्ति का एहसास नहीं होता। ऐसे समय में एक सच्चे गुरु, अनुभवी बुजुर्ग या शुभचिंतक की आवश्यकता होती है, जो उसे उसकी वास्तविक क्षमता याद दिला सके। हनुमान जी अपनी शक्तियाँ क्यों भूल गए थे? लोकप्रचलित कथा के अनुसार, बाल्यावस्था में हनुमान जी अत्यंत चंचल और शक्तिशाली थे। वे अपनी अलौकिक शक्तियों का उपयोग खेल-खेल में किया करते थे। उनकी बालसुलभ शरारतों से परेशान होकर ऋषियों ने उन्हें शाप दिया कि वे अपनी शक्तियों को भूल जाएँगे। जब कोई योग्य व्यक्ति उन्हें उनकी शक्तियों का स्मरण कराएगा, तभी उन्हें अपनी सामर्थ्य का पुनः बोध होगा। इस शाप के कारण हनुमान जी के पास अपार शक्ति होते हुए भी उन्हें उसका पूरा ज्ञान नहीं था। उनका व्यक्तित्व इतना सरल और विनम्र था कि वे स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ नहीं मानते थे। समुद्र पार करने की चुनौती माता सीता की खोज करते हुए वानर सेना समु...

जीवन के बंद दरवाजे खोलने वाली छोटी-छोटी आदतें

  जीवन के बंद दरवाजे खोलने वाली छोटी-छोटी आदतें मनुष्य की वास्तविक पहचान उसके धन, पद या बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि उसकी आदतों, सोच, संस्कार, वाणी और व्यवहार से होती है। जीवन में कुछ गुण देखने में छोटे लगते हैं, लेकिन यही गुण सफलता, सम्मान, आनंद और समृद्धि के सभी दरवाजे खोलते हैं। सफाई से सकारात्मकता की शुरुआत सफाई केवल घर, कार्यालय या कपड़ों की नहीं होती; हमारे विचारों और मन की सफाई भी उतनी ही आवश्यक है। जिस प्रकार हम घर से कचरा हटाते हैं, उसी प्रकार मन से ईर्ष्या, क्रोध, अहंकार और कटुता को भी बाहर निकालना चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि हमारा कार्यस्थल साफ और व्यवस्थित है, तो काम करने में मन लगता है। इसी प्रकार, यदि मन नकारात्मक विचारों से मुक्त है, तो हम सही निर्णय ले पाते हैं और दूसरों के साथ अच्छे संबंध बना पाते हैं। शांत वाणी और नम्रता की शक्ति शांत बोलना और नम्र रहना कमजोरी नहीं, बल्कि हमारे मजबूत व्यक्तित्व की पहचान है। नम्रता वह गुण है जो उन दरवाजों को भी खोल देती है, जिन्हें अहंकार कभी नहीं खोल सकता। मान लीजिए, किसी कार्यालय में दो कर्मचारी अपनी समस्या लेकर अधिकारी के पास जाते ...

सफलता संयोग नहीं, सही आदतों का परिणाम है

  सफलता संयोग नहीं, सही आदतों का परिणाम है हर व्यक्ति जीवन में सफल होना चाहता है, लेकिन सफलता केवल इच्छा करने से नहीं मिलती। इसके लिए स्पष्ट लक्ष्य, निरंतर मेहनत, आत्मविश्वास और धैर्य की आवश्यकता होती है। सफल लोगों की कहानियाँ अलग हो सकती हैं, पर उनकी कुछ आदतें समान होती हैं। आइए सफलता के छह महत्वपूर्ण सिद्धांतों को समझें। 1. हद से ज्यादा मेहनत करना सपने तभी वास्तविकता बनते हैं, जब उनके पीछे सामान्य से अधिक प्रयास किया जाए। कठिन परिश्रम का अर्थ केवल लंबे समय तक काम करना नहीं, बल्कि सही दिशा में पूरे समर्पण के साथ काम करना है। असफलता मिलने पर रुकने के बजाय उससे सीखकर दोबारा प्रयास करना ही सफलता की असली शुरुआत है। 2. बुरी आदतों का त्याग करना हमारी आदतें ही हमारा भविष्य बनाती हैं। आलस्य, नकारात्मक सोच, समय की बर्बादी, अनावश्यक खर्च और अनुशासनहीनता जैसी आदतें व्यक्ति की प्रगति में बाधा बनती हैं। जो व्यक्ति स्वयं पर नियंत्रण रख सकता है, वही अपने जीवन को सही दिशा दे सकता है। सफलता पाने के लिए नई अच्छी आदतें अपनाने के साथ-साथ पुरानी बुरी आदतों को छोड़ना भी आवश्यक है। 3. संघर्ष करने की हिम...

खुश रहिए, परिस्थितियाँ स्वयं बदलने लगेंगी

  खुशी का इंतज़ार नहीं, खुशी से बदलाव की शुरुआत करें हम अक्सर सोचते हैं—जब परिस्थितियाँ बदल जाएँगी, तब हम खुश होंगे। जब अच्छी नौकरी मिलेगी, आय बढ़ेगी खुश रहिए, परिस्थितियाँ स्वयं बदलने लगेंगी हम अक्सर सोचते हैं—“जब परिस्थितियाँ बदलेंगी, तब मैं खुश रहूँगा।” जब मुझे सफलता मिलेगी, जब आर्थिक स्थिति बेहतर होगी, जब लोग मुझे समझेंगे, जब तनाव कम होगा—तभी जीवन में खुशी आएगी। लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है— जब हम खुश रहना सीख लेते हैं, तब परिस्थितियाँ बदलने लगती हैं। खुशी किसी विशेष परिस्थिति का परिणाम नहीं, बल्कि हमारे विचारों और दृष्टिकोण का चुनाव है। यदि हम हर समय सही अवसर, सही व्यक्ति या सही समय की प्रतीक्षा करते रहेंगे, तो शायद खुशी हमेशा हमसे दूर ही रहेगी। जीवन कभी भी पूरी तरह समस्यामुक्त नहीं होता। एक समस्या समाप्त होती है तो दूसरी चुनौती सामने आ जाती है। इसलिए खुशी को भविष्य से जोड़ना, अपने वर्तमान को खो देना है। जब मन प्रसन्न होता है, तो हमारी सोच सकारात्मक हो जाती है। सकारात्मक सोच हमें समस्याओं के बजाय उनके समाधान देखने की शक्ति देती है। हम बेहतर निर्णय लेते हैं, नए अवसरों को...

अपने कौशल से अपनी पहचान और बाज़ार-मूल्य स्वयं बनाइए

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  अपने कौशल से अपनी पहचान और बाज़ार-मूल्य स्वयं बनाइए आज के प्रतिस्पर्धी युग में केवल प्रतिभाशाली होना पर्याप्त नहीं है। सफलता प्राप्त करने, आर्थिक रूप से सक्षम बनने और बाज़ार में अपनी विशेष पहचान स्थापित करने के लिए कौशल, प्रतिभा, निरंतर मेहनत और अतिरिक्त प्रयास का सही संयोजन आवश्यक है। हर व्यक्ति के भीतर कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है। कोई तकनीकी रूप से सक्षम होता है, किसी की संवाद क्षमता प्रभावशाली होती है, कोई रचनात्मक विचारों से भरपूर होता है, तो कोई नेतृत्व और प्रबंधन में कुशल होता है। लेकिन प्रतिभा केवल एक संभावना है। जब उसे ज्ञान, अभ्यास और अनुभव के माध्यम से विकसित किया जाता है, तभी वह उपयोगी कौशल में परिवर्तित होती है। ऊँची महत्वाकांक्षाओं के साथ उड़ान भरिए अपने सपनों और महत्वाकांक्षाओं को सीमित मत कीजिए। आकाश में ऊँची उड़ान भरने के लिए पहले अपने भीतर आत्मविश्वास पैदा करना आवश्यक है। दुनिया आपके बारे में क्या सोचती है, इससे अधिक महत्त्वपूर्ण यह है कि आप स्वयं अपनी योग्यता, क्षमता और संभावनाओं को कैसे देखते हैं। किसी दूसरे व्यक्ति को यह निर्णय लेने का अधिकार मत दीजिए कि ब...

संवेदना — मनुष्य होने का वास्तविक अर्थ

संवेदना — मनुष्य होने का वास्तविक अर्थ “संवेदना” संस्कृत से उत्पन्न एक अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण शब्द है। इसका अर्थ है—किसी दूसरे व्यक्ति के सुख-दुःख, पीड़ा, भावनाओं और परिस्थितियों को हृदय से अनुभव करना। संवेदना केवल किसी के प्रति दया दिखाना नहीं है, बल्कि स्वयं को उसकी स्थिति में रखकर उसकी भावनाओं को समझना है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारे पास तकनीक, सुविधाएँ और साधन तो बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन एक-दूसरे को सुनने और समझने का समय कम होता जा रहा है। ऐसे समय में संवेदना ही वह मानवीय गुण है, जो रिश्तों को जीवित रखता है। किसी निराश व्यक्ति से प्रेमपूर्वक बात करना, जरूरतमंद की सहायता करना, बीमार व्यक्ति का हाल पूछना या किसी दुःखी व्यक्ति के पास कुछ समय शांत बैठना—ये सभी संवेदना के वास्तविक रूप हैं। संवेदना शब्दों से अधिक हमारे व्यवहार में दिखाई देती है। कई बार किसी व्यक्ति को बड़ी सहायता की आवश्यकता नहीं होती; उसे केवल ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है, जो बिना कोई निर्णय दिए उसकी बात सुन सके। हमारा एक छोटा-सा सहयोग, एक सकारात्मक वाक्य या स्नेहपूर्ण स्पर्श किसी के जीवन में आशा की नई किरण जगा ...

जो आप सोच सकते हैं, वो आप कर सकते हैं — क्योंकि हर रचना पहले विचार में जन्म लेती है

  जो आप सोच सकते हैं, वो आप कर सकते हैं — क्योंकि हर रचना पहले विचार में जन्म लेती है दुनिया में जो कुछ भी आज हमें दिखाई देता है—बड़ी इमारतें, हवाई जहाज, मोबाइल फोन, इंटरनेट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष यान या कोई छोटा-सा उपयोगी उपकरण—इन सभी की शुरुआत कभी  एक विचार  से हुई थी। किसी व्यक्ति ने पहले उसे अपने मन में देखा, फिर उस पर विश्वास किया और उसके बाद उसे वास्तविकता में बदलने के लिए काम किया। इसीलिए कहा जा सकता है— “जो आप सोच सकते हो, वो आप कर सकते हो; और जिसकी आप कल्पना कर सकते हो, उसकी रचना भी हो सकती है।” हर Innovation की शुरुआत Imagination से होती है किसी भी नई खोज या आविष्कार के बनने से पहले उसका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं होता। वह सबसे पहले किसी इंसान के दिमाग में एक  Idea  के रूप में जन्म लेता है। एक समय था जब इंसान के लिए आसमान में उड़ना केवल सपना था। लेकिन किसी ने सोचा— “क्या इंसान भी उड़ सकता है?”  इसी सोच ने प्रयोग को जन्म दिया और प्रयोग ने विमान को। यही प्रक्रिया लगभग हर Innovation में दिखाई देती है: Imagination → Idea → Belief → Planning → Act...

जिस प्रोफेशन में हैं, उसमें Maximum तक जाइए

  जिस प्रोफेशन में हैं, उसमें Maximum तक जाइए जीवन में सफलता केवल इस बात से तय नहीं होती कि आपने कौन-सा  profession  चुना है। असली सफलता इस बात से तय होती है कि आपने अपने चुने हुए profession में  कितनी ऊँचाई तक पहुँचने की कोशिश की। चाहे आप  Teacher, Engineer, Doctor, Businessman, Researcher, Farmer, Artist या Entrepreneur  हों—अपने क्षेत्र में केवल काम करने वाले व्यक्ति मत बनिए, बल्कि उस क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाने का प्रयास कीजिए। मान लीजिए कोई व्यक्ति  Teacher  है। उसके पास दो रास्ते हैं। पहला—रोज कॉलेज या स्कूल जाना, lecture लेना, syllabus पूरा करना और महीने के अंत में salary लेना। दूसरा—वही teaching करते हुए अपने knowledge को लगातार बढ़ाना, students को innovation के लिए प्रेरित करना, research करना, नई technology सीखना, books और research papers लिखना, patents और projects पर काम करना और अपने students को आगे बढ़ाना। दोनों का profession एक ही है, लेकिन  सोच और मंज़िल अलग है। यही अंतर सामान्य career और असाधारण career के बीच होता है। इस...

You Always Have a Chance to Change Yourself Before It’s Too Late

You Always Have a Chance to Change Yourself Before It’s Too Late ज़िंदगी में सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि  बदलाव कभी भी शुरू किया जा सकता है।  चाहे बात हमारी  Corporate Life  की हो,  Personal Life  की हो या  Health  की—जब तक हम अपनी स्थिति को पहचानकर सही निर्णय लेने के लिए तैयार हैं, तब तक देर नहीं हुई है। कई बार हम सोचते हैं— “अब बहुत देर हो चुकी है…” लेकिन सच यह है कि देर तब होती है, जब हम बदलाव की जरूरत समझने के बाद भी कुछ नहीं बदलते। 1. Corporate Life — पद से पहले खुद को Upgrade करें Corporate life में हम अक्सर promotion, salary, position और recognition के पीछे भागते रहते हैं। वर्षों तक एक ही तरीके से काम करते हुए हमें लगता है कि experience ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। लेकिन दुनिया तेजी से बदल रही है।  AI, automation, new technology और new skills  काम करने के तरीके बदल रहे हैं। ऐसे में केवल पुराना experience पर्याप्त नहीं है। अगर आपको महसूस हो रहा है कि आपकी knowledge update नहीं है, तो यह निराश होने का कारण नहीं बल्कि  खुद को upgra...

दुनिया में आए हैं तो जीना ही पड़ेगा…

  दुनिया में आए हैं तो जीना ही पड़ेगा… “दुनिया में आए हैं तो जीना ही पड़ेगा, और जीना है तो मुश्किलों का सामना करना ही पड़ेगा। छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी, नए दौर में लिखेंगे हम अपनी नई कहानी।” ज़िंदगी कभी भी एक सी नहीं रहती। कभी सफलता मिलती है, तो कभी असफलता हमें कुछ नया सिखाती है। कभी अपने साथ खड़े होते हैं, तो कभी रास्ता अकेले तय करना पड़ता है। लेकिन यही उतार-चढ़ाव हमें मजबूत बनाते हैं। जीवन में मिला  “ज़हर” केवल दर्द नहीं है —वह संघर्ष, असफलता, आलोचना, निराशा और कठिन परिस्थितियों का प्रतीक है। इन्हें पीकर हार जाना नहीं, बल्कि इन्हीं अनुभवों को अपनी  ताकत में बदल देना  असली जीवन है। जो बीत गया, उसे बार-बार सोचकर आज को कमजोर करने से बेहतर है कि उससे सीखकर आगे बढ़ा जाए।  कल हमारी सीख थी, आज हमारा अवसर है और आने वाला कल हमारी नई कहानी है। नई शुरुआत के लिए हमेशा सही समय का इंतज़ार जरूरी नहीं। एक नया विचार, एक नया निर्णय और एक छोटा-सा कदम भी जिंदगी की दिशा बदल सकता है। इसलिए— पुराने पन्नों पर अफसोस मत करो, नया पन्ना खोलो और नई शुरुआत करो। मुश्किलें आएँ तो उ...

सपनों को सिर्फ देखो नहीं, उन्हें Goal बनाओ हर Goal की एक तारीख तय करो

  सपनों को सिर्फ देखो नहीं, उन्हें Goal बनाओ हर इंसान सपने देखता है, लेकिन हर सपना पूरा नहीं होता। फर्क सिर्फ इतना है कि कुछ लोग सपनों को  इच्छा  बनाकर छोड़ देते हैं, जबकि कुछ लोग उन्हें  Goal  बनाकर हासिल करने की दिशा में काम करते हैं। अपने सपनों को Goal Setting के हिसाब से देखिए। आप जीवन में क्या बनना चाहते हैं, क्या हासिल करना चाहते हैं और कहाँ पहुँचना चाहते हैं—इसे केवल मन में मत रखिए। उसकी एक  लिस्ट बनाइए और लिखकर अपने सामने रखिए। सुबह उठते ही अपने Goals को देखिए। रोज खुद से पूछिए— “आज मैं अपने लक्ष्य के लिए क्या करने वाला हूँ?” जब आपका लक्ष्य रोज आपकी आँखों के सामने रहता है, तो आपका दिमाग भी उसी दिशा में अवसर, रास्ते और समाधान तलाशना शुरू करता है। सपना बड़ा हो सकता है, लेकिन शुरुआत हमेशा छोटे कदम से होती है। इसलिए— अपने सपनों की लिस्ट बनाइए। हर सपने को स्पष्ट Goal में बदलिए। Goal पूरा करने की समय-सीमा तय कीजिए। उसे ऐसी जगह रखिए जहाँ रोज आपकी नजर पड़े। हर दिन कम से कम एक कदम उस दिशा में बढ़ाइए। समय-समय पर अपनी प्रगति जाँचिए। याद रखिए— “जो सपना सिर्फ आँ...

गुंतवणूक पैशाची नाही, बुद्धीची करा!

  गुंतवणूक पैशाची नाही, बुद्धीची करा! आपण जेव्हा  “गुंतवणूक”  हा शब्द ऐकतो, तेव्हा सर्वप्रथम डोळ्यासमोर येतो तो पैसा—शेअर्स, मालमत्ता, सोने किंवा व्यवसाय. पण आयुष्यातील सर्वात मोठी गुंतवणूक ही पैशाची नसून  बुद्धीची, ज्ञानाची आणि योग्य विचारांची  असते. “गुंतवणूक पैशाची नाही, बुद्धीची करा; कारण पैसा संपतो, पण बुद्धी नवी संपत्ती निर्माण करते.” पैसा आपल्याला साधने उपलब्ध करून देतो, पण त्या साधनांचा योग्य उपयोग कसा करायचा, हे बुद्धी ठरवते. पैसा हातात असूनही योग्य निर्णय घेता आला नाही, तर तो संपायला वेळ लागत नाही. याउलट, मर्यादित साधने असतानाही योग्य विचार, ज्ञान आणि कल्पकता असेल तर माणूस नव्या संधी निर्माण करू शकतो. “पैशाची गुंतवणूक श्रीमंत बनवते, पण बुद्धीची गुंतवणूक यशस्वी बनवते.” श्रीमंती आणि यश यात फरक आहे. पैसा संपत्ती वाढवू शकतो; पण ज्ञान, अनुभव, कौशल्य आणि निर्णयक्षमता व्यक्तिमत्त्व घडवतात. स्वतःच्या बुद्धीवर केलेली गुंतवणूक आयुष्यभर आपल्यासोबत राहते. वाचन, शिक्षण, नवीन कौशल्ये शिकणे, प्रयोग करणे, अपयशातून धडा घेणे आणि सतत स्वतःला विकसित करणे—हीच बुद्धीची खरी ...