भूख, ज़िद और पागलपन जिस इंसान में होता है, वह ज़िंदगी में कुछ भी कर सकता है।
भूख, ज़िद और पागलपन: बदलाव की असली ताक़त
कहा जाता है कि
“भूख, ज़िद और पागलपन जिस इंसान में होता है, वह ज़िंदगी में कुछ भी कर सकता है।”
यह केवल एक कथन नहीं, बल्कि इतिहास की बार-बार दोहराई गई सच्चाई है।
हर बड़ा खिलाड़ी, हर सफल बिज़नेसमैन और हर इतिहास रचने वाला इंसान एक जैसी सोच रखता है —
भूख, ज़िद और पागलपन।
यह तीनों शब्द किताबों में नहीं, मैदान और मेहनत में सिखाए जाते हैं।
भूख: सिर्फ़ रोटी की नहीं, बदलाव की भी
भूख केवल पेट की नहीं होती।
यह सम्मान, आज़ादी और न्याय की भी हो सकती है।
ऐतिहासिक उदाहरण – फ्रांसीसी क्रांति (1789)
फ्रांस में आम जनता भुखमरी से जूझ रही थी। राजा और अमीर वर्ग ऐश कर रहा था, जबकि जनता के पास खाने को रोटी तक नहीं थी।
इस भूख ने लोगों को डर से बाहर निकाला और एक पूरी व्यवस्था को गिरा दिया।
नतीजा:
राजशाही का अंत
लोकतंत्र की नींव
“जनता की ताक़त” का एहसास
जब भूख सीमा पार करती है, तो वह क्रांति बन जाती है।
खेल की दुनिया: जीत की भूख
उदाहरण – विराट कोहली
विराट कोहली सिर्फ़ टैलेंट से महान नहीं बने।
उनके अंदर थी खुद को बेहतर बनाने की भूख।
फिटनेस के लिए पूरी लाइफ़स्टाइल बदल दी
कप्तानी में आलोचना झेली
हर मैच में खुद से ज़्यादा की उम्मीद
लोग कहते थे: “इतनी मेहनत की ज़रूरत नहीं”
लेकिन वही भूख उन्हें दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों में ले आई।
सीख:
अगर आपके अंदर जीत की भूख है, तो बहाने अपने आप ख़त्म हो जाते हैं।
ज़िद: हार न मानने की जिद
ज़िद को अक्सर नकारात्मक माना जाता है, लेकिन सकारात्मक ज़िद इतिहास रचती है।
ऐतिहासिक उदाहरण – महात्मा गांधी
महात्मा गांधी के पास न सेना थी, न हथियार।
उनके पास थी सिर्फ़ सत्य और अहिंसा की ज़िद।
अंग्रेज़ों के सामने झुकने से इनकार
बार-बार जेल जाने के बावजूद पीछे न हटना
नमक जैसे छोटे मुद्दे को आज़ादी की लड़ाई बना देना
यह ज़िद ही थी जिसने एक साम्राज्य को झुकने पर मजबूर कर दिया।
उदाहरण – एम.एस. धोनी
धोनी का सफ़र आसान नहीं था।
रेलवे में टिकट चेकर से लेकर वर्ल्ड कप विजेता कप्तान बनने तक —
यह सफ़र ज़िद का नाम है।
छोटे शहर से आने के बावजूद बड़े सपने
आलोचनाओं के बावजूद शांत रहना
आख़िरी गेंद तक भरोसा
सीख:
ज़िद का मतलब ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं,
ज़िद का मतलब है — हार के बाद भी खुद पर भरोसा।
पागलपन: जो दुनिया को समझ न आए
हर बड़ा सपना पहले पागलपन ही लगता है।
जो समाज से अलग सोचता है, वही इतिहास बदलता है।
ऐतिहासिक उदाहरण – थॉमस एडिसन
जब एडिसन बल्ब बनाने में हज़ारों बार असफल हुए, तो लोग उन्हें पागल कहते थे।
लेकिन उन्होंने कहा:
“मैं असफल नहीं हुआ, मैंने 1000 तरीके खोज लिए जो काम नहीं करते।”
वही पागलपन आज पूरी दुनिया को रोशनी देता है।
उदाहरण – एलन मस्क
जब एलन मस्क ने कहा:
इलेक्ट्रिक कार आम होगी
इंसान मंगल ग्रह जाएगा
दुनिया ने उन्हें पागल कहा।
पैसे डूबे
कंपनियाँ लगभग बंद हो गईं
लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी
आज टेस्ला और स्पेसएक्स भविष्य बदल रहे हैं।
सीख:
अगर आपका सपना सबको समझ आ जाए,
तो समझ लो सपना छोटा है।
दुनिया में हर सफल इंसान के पीछे कोई जादू नहीं होता।
उनके पास सिर्फ़ तीन चीज़ें होती हैं —
भूख, ज़िद और पागलपन- ईसके कुछ ओर पहेलु मे बहोत महान व्यक्तिमत्व का योगदान है जैसे की
सचिन तेंदुलकर: परफेक्शन की भूख
सचिन तेंदुलकर को “भगवान” नहीं बनाया गया,
उन्होंने खुद को भगवान जैसा समर्पित किया।
16 साल की उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट
24 साल तक लगातार प्रेशर
एक भी दिन बिना अभ्यास के नहीं
लोगों को लगता है टैलेंट ही काफ़ी था,
लेकिन सचिन की असली ताक़त थी —
खुद से बेहतर बनने की भूख।
सीख:
टैलेंट शुरुआत देता है,
लेकिन भूख ही आपको शिखर तक ले जाती है।
दशरथ मांझी: ज़िद जो पहाड़ काट दे
दशरथ मांझी कोई इंजीनियर नहीं थे।
न उनके पास मशीनें थीं,
न पैसा।
लेकिन उनकी पत्नी की मौत ने उनके अंदर
बदलाव की ज़िद पैदा कर दी।
अकेले हथौड़ा और छेनी
22 साल की मेहनत
पहाड़ के बीच रास्ता
दुनिया उन्हें पागल कहती रही,
लेकिन वही “पागलपन” आज लाखों लोगों की ज़िंदगी आसान बना रहा है।
सीख:
अगर ज़िद सच्ची हो,
तो हालात झुक जाते हैं।
मैरी कॉम: जीत की भूख, हार की इजाज़त नहीं
मणिपुर के छोटे से गाँव से
ओलंपिक तक का सफ़र आसान नहीं था।
आर्थिक मुश्किलें
सामाजिक दबाव
माँ बनने के बाद भी वापसी
मैरी कॉम की भूख थी —
खुद को साबित करने की।
सीख:
परिस्थितियाँ आपको रोक नहीं सकतीं,
अगर आपकी भूख आपसे बड़ी हो।
ए.पी.जे. अब्दुल कलाम: सपनों का पागलपन
एक अख़बार बेचने वाला लड़का
भारत का राष्ट्रपति बना।
लोग उनके सपनों को असंभव कहते थे —
मिसाइल, स्पेस, आत्मनिर्भर भारत।
लेकिन कलाम साहब कहते थे:
“सपने वो नहीं जो नींद में आएँ,
सपने वो हैं जो नींद उड़ा दें।”
सीख:
पागलपन वही है जो देश बनाता है।
जे.के. रोलिंग: हार से जीत तक
गरीबी
रिजेक्शन
अकेलापन
12 पब्लिशर्स ने उनकी किताब ठुकरा दी।
लेकिन उन्होंने लिखना नहीं छोड़ा।
आज हैरी पॉटर दुनिया की सबसे मशहूर कहानियों में से है।
सीख:
ना सुनने की ताक़त ही सफलता की पहचान है।
तीनों का मेल: असंभव को संभव बनाना
जब
भूख लक्ष्य की हो,
ज़िद उसे पाने की हो,
और पागलपन समाज की सोच से अलग चलने का हो
तो इंसान सिर्फ़ अपनी ज़िंदगी नहीं बदलता,
इतिहास बदल देता है।
निष्कर्ष
भूख रखो —अच्छे नंबरों की, स्किल्स की, खुद को बेहतर बनाने की।
ज़िद रखो —
रोज़ थोड़ा बेहतर बनने की।
पागलपन रखो —
भीड़ से अलग सोचने का।
भूख इंसान को उठाती है,
ज़िद उसे टिकाए रखती है,
और पागलपन उसे भीड़ से अलग करता है।
इसीलिए कहा गया है —
भूख, ज़िद और पागलपन वाला इंसान ज़िंदगी में कुछ भी कर सकता|
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