📸 1960 से 1980 के बीच जन्मी पीढ़ी के नाम… आपने सिर्फ बदलाव को देखा नहीं — उसे पूरे आत्मविश्वास से अपनाया। यह आपकी कहानी है। एक ऐसी पीढ़ी को सलाम, जिसने सच में ज़िंदगी जी। 📸 आपने बदलाव को जिया स्याही वाले पेन से लेकर स्मार्टफोन तक, पोस्टकार्ड से वीडियो कॉल तक, नंगे पाँव खेलों से कार की सवारी तक — आपने सब कुछ देखा, और सब कुछ अपनाया। 📸 बचपन था असली कुकर की रिंग्स और माचिस की तीलियों से खेलना, कच्चे आम तोड़ कर खाना बिना डर के, साइकिल पर दो-तीन लोग बैठ कर जाना... खुशियाँ सरल थीं। और मुफ्त। 📸 पड़ोस = परिवार न निमंत्रण, न औपचारिकता। बस किसी के घर चले जाओ — खाना भी मिलेगा, डाँट भी — जैसे अपने घर में। और कभी अजीब नहीं लगा। 📸 ब्रेकिंग न्यूज़? "तेरे पापा स्कूल आए हैं — भाग!" अगर कोई दोस्त दो दिन स्कूल नहीं आया, तो उसके घर कोई बैग लेकर पहुँच जाता था। ऐसी थी दोस्ती। 📸 आइकॉन्स और आइडल्स कपिल, गावस्कर, स्टीफी ग्राफ, सैम्प्रास को चीयर किया, अमिताभ, राजेश खन्ना, माधुरी, SRK पर दिल हार बैठे। वीसीआर पर किराए की कैसेट्स — एक साथ 5 फिल्में! मनोरंजन का असली स्वाद आपने चखा। 📸 अनुशासन और सम्...
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